ये वफ़ा तो उस वक्त की बात है ऐ फ़राज़ 🙂


ये वफ़ा तो उस वक्त की बात है ऐ फ़राज़,
जब मकान कच्चे और लोग सच्चे हुआ करते थे।
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Yeh Wafa Toh Uss Waqt Ki Baat Hai Faraz,
Jab Makaan Kachche Aur Log Sachche Hua Karte The.
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