Intezaar Shayari - इंतज़ार शायरी

वो करीब ही न आये तो इज़हार क्या करते ❤


वो करीब ही न आये तो इज़हार क्या करते,
खुद बने निशाना तो शिकार क्या करते,
मर गए पर खुली रखी आँखें,
इससे ज्यादा किसी का इंतजार क्या करते! 💔
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Woh kareeb hi na aaye to izhaar kya karte,
Khud bane nishana to shikaar kya karte,
Mar gaye par khuli rakhi aankhein,
Is se zyada kisi ka intezar kya karte. 💔
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