Intezaar Shayari - इंतज़ार शायरी

लगे है फोन जब से​ ​तार भी नहीं आते​​ ☹️


लगे है फोन जबसे   तार भी नहीं आते ,
 बूढी आँखों के अब मददगार भी नहीं आते ,
 गए है जबसे शहर में कमाने को लड़के ,
 हमारे गाँव में त्यौहार भी नहीं आते।
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