Intezaar Shayari - इंतज़ार शायरी

कितना दूर निकल गए रिश्ते निभाते निभाते 🙏


कितना दूर निकल गए रिश्ते निभाते निभाते,
खुद को खो दिया हमने अपनों को पाते पाते,
लोग कहते है दर्द है मेरे दिल में,
और हम थक गये मुस्कुराते मुस्कुराते.
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Kitna Dur Nikal Gaye Riste Nibhate Nibate,
Khud Ko Kho Diya Humne Apno Ko Pate Pate,
Log Kahte Hai Dard Hai Mere Dil Me,
Aur Hum Thak Gye Muskurate Muskurate.
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