Ghalib Shayari - ग़ालिब शायरी

उजड़ी हुई दुनिया को तू आबाद न कर 😌


उजड़ी हुई दुनिया को तू आबाद न कर,
बीते हुए लम्हों को तू याद न कर,
एक कैद परिंदे ने ये कहा हम से..
मैं भुल चुका हूं उड़ना मुझे आजाद न कर!
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Ujadi hui duniya ko tu aabad na kar,
Behte hue lamho ko tu yaad na kar,
Ek qaid parinde ka hai tumse yahi kehana,
Mai bhool chuka hoon udna..Mujhe aazad na kar.
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