Ghalib Shayari - ग़ालिब शायरी

कभी नेकी भी उस के जी में गर आ जाए है मुझ से


कभी नेकी भी उस के जी में गर आ जाए है मुझ से
जफ़ाएँ कर के अपनी याद शरमा जाए है मुझ से
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