Ghalib Shayari - ग़ालिब शायरी

इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना


इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना
दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना
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