Ghalib Shayari - ग़ालिब शायरी

हमारा ज़िक्र भी अब जुर्म हो गया है वहाँ 😇


हमारा ज़िक्र भी अब जुर्म हो गया है वहाँ,
दिनों की बात है महफ़िल की आबरू हम थे,
ख़याल था कि ये पथराव रोक दें चल कर,
जो होश आया तो देखा लहू लहू हम थे।
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Humara Zikr Bhi Ab Jurm Ho Gaya Hai Wahan,
Dino Ki Baat Hai Mefil Ki Aabru Hum The,
Khayal Tha Ke Yeh Pathrav Rok Dein Chal Kar,
Jo Hosh Aaya Toh Dekha Lahu Lahu Hum The.
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