Ghalib Shayari - ग़ालिब शायरी

दर्द से हाथ न मिलाते तो और क्या करते 😧


दर्द से हाथ न मिलाते तो और क्या करते,
गम के आंसू न बहते तो और क्या करते,
उसने मांगी थी हमसे रौशनी की दुआ,
हम खुद को न जलाते तो और क्या करते!
Click To Tweet

Dard se hath na milate to aur kya karte,
Gham ke aansoo na bahate to aur kya karte,
Usne maangi thi humse roshni ki dua,
Hum khud ko na jalate to or kya karte
Click To Tweet
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Most Popular

To Top